मुंबई: ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ आज 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के मौके पर गणपति बप्पा को विदाई दी जाएगी। गणेश उत्सव के दौरान जिस श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान गणेश की स्थापना और पूजा की जाती है, उसी भाव के साथ विसर्जन भी किया जाता है। घर या घाट पर गणेश विसर्जन करते समय परंपरागत विधि और नियमों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह से लेकर देर रात तक गणेश विसर्जन का सिलसिला चलता है। इस दौरान घाटों और विसर्जन स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गणेश विसर्जन के लिए सुबह, दोपहर, शाम और रात के अलग-अलग शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस दौरान चर, लाभ और अमृत के मुहूर्त बताए गए हैं।
दोपहर में गणेश विसर्जन के लिए दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। यह शुभ मुहूर्त रहेगा।
शाम के समय विसर्जन के लिए शाम 4 बजकर 45 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक का समय रहेगा। यह चर मुहूर्त है।
रात में गणेश विसर्जन के लिए रात 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 44 मिनट तक का समय बताया गया है। यह लाभ मुहूर्त है।
विसर्जन से पहले करें गणपति की पूजा
गणेश विसर्जन से पहले घर में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। कुछ परिवारों में इस दिन हवन करने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान बप्पा को मोदक, लड्डू, दूर्वा और फल का भोग लगाएं। इसके बाद गणेश जी की आरती करें और उत्सव के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
पूजा पूरी होने के बाद गणेश प्रतिमा को उसके स्थान से हल्के से हिलाने की परंपरा है। इसके बाद विसर्जन की तैयारी की जाती है।
घाट पर कैसे करें गणेश विसर्जन
अगर गणेश विसर्जन घाट पर कर रहे हैं तो अपने साथ अक्षत, रोली, कुमकुम, दीपक और भोग की सामग्री ले जाएं। विसर्जन स्थल पर पहुंचने के बाद एक बार फिर गणपति बप्पा की आरती करें और उन्हें भोग अर्पित करें।
इसके बाद ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के साथ प्रतिमा को सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित करें। परंपरा के अनुसार गणेश प्रतिमा को पहले तीन बार आंशिक रूप से जल में डुबोया जाता है और इसके बाद पूरी प्रतिमा को जल में प्रवाहित किया जाता है।
घर पर विसर्जन कर रहे हैं तो रखें इन बातों का ध्यान
अगर घर पर गणेश विसर्जन कर रहे हैं तो बाल्टी या टब में साफ पानी भरें। इसके पास एक चौकी पर गणपति बप्पा को विराजमान करें। उनकी आरती करें और भोग लगाएं।
इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक तीन बार आंशिक रूप से पानी में डुबोएं और फिर पूरी प्रतिमा को पानी में समाहित कर दें। प्रतिमा के पानी में घुलने के बाद उस जल को सम्मानपूर्वक गमलों या पौधों में डालने की परंपरा बताई गई है।
विसर्जन के दौरान इन गलतियों से बचें
गणेश विसर्जन के दौरान जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इसे श्रद्धा और शांतिपूर्ण तरीके से करने की सलाह दी जाती है। विसर्जन स्थल तक नंगे पैर जाने की परंपरा बताई गई है। खासतौर पर गणेश प्रतिमा को उठाने वाले व्यक्ति को जूते-चप्पल नहीं पहनने की सलाह दी जाती है।
गणेश प्रतिमा को जल में एकदम से डालने के बजाय धीरे-धीरे प्रवाहित करें। वहीं, घर में विसर्जन के बाद अगर प्रतिमा पूरी तरह पानी में न घुले तो उसके बचे हुए हिस्से का सम्मानपूर्वक और पर्यावरण के अनुकूल निपटान करना चाहिए।
